अटल मंथन
नकद नारायण,हैं नाराज
टिकते नहीं,किसी के पास !
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जिंदगी बैंक के,इर्द गिर्द सिमट गई
मिल नहीं रही है,करंसी अब भी नई !
2000 और 100 के नोट,चल रहे बाजार में
पर 500 के नोट बिना,मुश्किल व्यापार में !
स्त्री-पुरुष,युवा-वृद्ध,सबके सब हैं परेशान
कहीं-कहीं मच जाती,लाइन में घमासान !
मंदी के दौर से,कोई व्यवसाय अछूता नहीँ
फिर भी देश की जनता के,धैर्य का जवाब नहीं !
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डॉ श्याम अटल
नकद नारायण,हैं नाराज
टिकते नहीं,किसी के पास !
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जिंदगी बैंक के,इर्द गिर्द सिमट गई
मिल नहीं रही है,करंसी अब भी नई !
2000 और 100 के नोट,चल रहे बाजार में
पर 500 के नोट बिना,मुश्किल व्यापार में !
स्त्री-पुरुष,युवा-वृद्ध,सबके सब हैं परेशान
कहीं-कहीं मच जाती,लाइन में घमासान !
मंदी के दौर से,कोई व्यवसाय अछूता नहीँ
फिर भी देश की जनता के,धैर्य का जवाब नहीं !
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डॉ श्याम अटल
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