Sunday, December 11, 2016

अटल मंथन
वैकल्पिक व्यवस्था,अपर्याप्त है
ए टी एम से कैश , नदारद है !
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नोटों की कालाबाजारी,हो रही है
मिलीभगत बिना,जो सम्भव नहीँ है !
कारोबारी मंदी से, जूझ रहे हैं
कमीशनखोरी वाले,फल फूल रहे हैं !
500 के नोट,अभी तक नदारद हैं
2000 के छुट्टे,नहीं मिल पा रहे !
वजनदार सिक्कों से,चल रहा है काम
आम आदमी,हो रहा परेशान !
उधार लेन देन का,चलन बढ़ा है
नकदी की किल्लत का,कुअसर पड़ा है !
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डॉ श्याम अटल

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