अटल मंथन
तेरा तुझको अर्पण,क्या लागे मेरा
नए वर्ष से उदित,हो रहा नया सवेरा !
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देशवासी अनुशासित,राष्ट्र भक्ति से भरपूर
प्रजातन्त्र भारत का,दुनिया में मशहूर !
बैंक खाली पड़े थे,लबालब भर गए
कर्जा ले ले जनता,जितना जी चाहे !
सरकारी खजाने खाली थे,भरे लबालब
राष्ट्र का विकास होगा,अब फटाफट !
दिक्कतों के बावजूद,नोटबंदी हुई सफल
देश में उपजेगी अब,समृद्धि की फसल !
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डॉ श्याम अटल
तेरा तुझको अर्पण,क्या लागे मेरा
नए वर्ष से उदित,हो रहा नया सवेरा !
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देशवासी अनुशासित,राष्ट्र भक्ति से भरपूर
प्रजातन्त्र भारत का,दुनिया में मशहूर !
बैंक खाली पड़े थे,लबालब भर गए
कर्जा ले ले जनता,जितना जी चाहे !
सरकारी खजाने खाली थे,भरे लबालब
राष्ट्र का विकास होगा,अब फटाफट !
दिक्कतों के बावजूद,नोटबंदी हुई सफल
देश में उपजेगी अब,समृद्धि की फसल !
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डॉ श्याम अटल
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