अटल वाणी - 507
अन्तर्दृष्टि !
( दिव्य दृष्टि )
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बाह्य संसार देखने हेतु,मिली है सबको दो आंखें
तीसरी आंख उसी के पास,जो ईश्वर से जुड़ना जाने !
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डॉ श्याम अटल
अन्तर्दृष्टि !
( दिव्य दृष्टि )
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बाह्य संसार देखने हेतु,मिली है सबको दो आंखें
तीसरी आंख उसी के पास,जो ईश्वर से जुड़ना जाने !
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डॉ श्याम अटल
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