Thursday, December 1, 2016

 अटल वाणी - 507
 अन्तर्दृष्टि !
( दिव्य दृष्टि )
---------------------------------------------------------------------
बाह्य संसार देखने हेतु,मिली है सबको दो आंखें
तीसरी आंख उसी के पास,जो ईश्वर से जुड़ना जाने !
---------------------------------------------------------------------
डॉ श्याम अटल

No comments:

Post a Comment