Friday, December 2, 2016

अटल मंथन
परेशान हैं नागरिक-हाल कहे वास्तविक !
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आँख के तारे आँख को,खटकने लगे
पेट्रोल की लाइन में,अब भटकने लगे !
पुराने नोट पम्प पर,नहीं चलेंगे
बैंक से लाएंगे तब,पेट्रोल भरेंगे !
सैलेरी वाले पूरी,सैलेरी न निकालें
निकालना चाहें भी,तो बैंक ही ना दें !
कैश की किल्लत क्यूं,बनी रहना चाहिये ?
सरकार को जनता से,सहानुभूति रखना चाहिये !
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डॉ श्याम अटल 

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