अटल मंथन
कितना अपना,कितना पराया ?
जमाकर्ता भी,समझ न पाया !
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प्रादेशिक सरकारें,परेशान हैं
नोट बन्दी ने,चोट की ईमान पे !
माया का आनन्द,खतरे में पड़ा
खाते में करोड़ों से,संकट बढ़ा !
बेनामी सम्पत्ति से,लालू परेशान हैं
अचम्भित से लगे,नीतीश के बयान से !
शतरंज से भी दिमागदार,खेल चल रहा है
विपक्षी दलों को,जरा न फल रहा है !
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डॉ श्याम अटल
कितना अपना,कितना पराया ?
जमाकर्ता भी,समझ न पाया !
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प्रादेशिक सरकारें,परेशान हैं
नोट बन्दी ने,चोट की ईमान पे !
माया का आनन्द,खतरे में पड़ा
खाते में करोड़ों से,संकट बढ़ा !
बेनामी सम्पत्ति से,लालू परेशान हैं
अचम्भित से लगे,नीतीश के बयान से !
शतरंज से भी दिमागदार,खेल चल रहा है
विपक्षी दलों को,जरा न फल रहा है !
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डॉ श्याम अटल
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