Friday, December 25, 2015

अटल मंथन
चिंतनीय !
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खोले बिना ही नाम,खुल जाता है
पहेली बनकर प्रश्न,सामने आता है !
कहिये कौन-कौन,खलनायक भ्राता हैं ?
हमें तो सर्वत्र दाग,नजर आता है !
जिस भी प्रकरण को खोलेंगे,भ्रष्टाचार मिलेगा
जिसे चाहेंगे उसका,सिंहासन हिलेगा !
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डॉ श्याम अटल 

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