अटल मंथन
ऑड-ईवन आफत है,राहत के आसार नहीं
हे भगवान ! बचा फंदे से,सबकी है चाहत यही !
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सड़कें सिकुड़ रही हैं,व्यवस्था बिगड़ रही है
गाड़ी तो घर में है,पर नहीं निकल रही है !
राजधानी में रहना,मुश्किल हो गया है
लगता है पलायन के ,दिन आ गए हैं !
कार चालक,ऑटो चालक,बन जाएं तो बुराई क्या ?
ऑड-ईवन के दायरे से,बाहर आएं तो बुराई क्या ?
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डॉ श्याम अटल
ऑड-ईवन आफत है,राहत के आसार नहीं
हे भगवान ! बचा फंदे से,सबकी है चाहत यही !
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सड़कें सिकुड़ रही हैं,व्यवस्था बिगड़ रही है
गाड़ी तो घर में है,पर नहीं निकल रही है !
राजधानी में रहना,मुश्किल हो गया है
लगता है पलायन के ,दिन आ गए हैं !
कार चालक,ऑटो चालक,बन जाएं तो बुराई क्या ?
ऑड-ईवन के दायरे से,बाहर आएं तो बुराई क्या ?
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डॉ श्याम अटल
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