अटल वाणी - 483
सूर्य नमस्कार !
(चमत्कार को नमस्कार ! )
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सूर्य ऊर्जा का,अक्षय भंडार है
दृश्यमान देव से,हमें प्यार है !
रोशनी से जीवन को,रोशन कर लें
आज से अवसाद को,तिलांजलि दें !
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डॉ श्याम अटल
सूर्य नमस्कार !
(चमत्कार को नमस्कार ! )
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सूर्य ऊर्जा का,अक्षय भंडार है
दृश्यमान देव से,हमें प्यार है !
रोशनी से जीवन को,रोशन कर लें
आज से अवसाद को,तिलांजलि दें !
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डॉ श्याम अटल
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