Tuesday, December 29, 2015

अटल मंथन
31 को रिहर्सल है,1 से चालान कटेंगे
नए वर्ष पर सरकारी,खजाने पुरजोर भरेंगे !
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कार है मगर बेकार है,उन्हें रिक्शे से प्यार है
वे बस में सवार हैं,पर मेट्रो भी तैयार है !
दिल्ली सरकार का,नायाब उपहार है
नए वर्ष में सुविधाओं का,भरपूर भंडार है ?
2016 की पूर्व संध्या पर,सड़कें खाली नजर आयेंगी
दिल्ली का वह दृश्य देखकर,जनता ताली बजायेगी !
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डॉ श्याम अटल 

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