अटल मंथन
अकल मारी जाने पर,विनाश भारी है
धर्म की धुरी पर,कट्टरता हावी है !
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आत्मघाती बनकर,दुनिया मिटाई जा रही
क्या आतंकवादियों को,रास नहीं आ रही ?
मरने का शौक है तो,अकेले मर जाईये
अपने साथ अन्यों का,क्यूं साथ तुम्हे चाहिये ?
जन्नत को जहन्नुम,हर रोज बनाया जा रहा
ईश्वरीय शक्ति को,क्यूँकर लजाया जा रहा ?
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डॉ श्याम अटल
अकल मारी जाने पर,विनाश भारी है
धर्म की धुरी पर,कट्टरता हावी है !
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आत्मघाती बनकर,दुनिया मिटाई जा रही
क्या आतंकवादियों को,रास नहीं आ रही ?
मरने का शौक है तो,अकेले मर जाईये
अपने साथ अन्यों का,क्यूं साथ तुम्हे चाहिये ?
जन्नत को जहन्नुम,हर रोज बनाया जा रहा
ईश्वरीय शक्ति को,क्यूँकर लजाया जा रहा ?
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डॉ श्याम अटल
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