Tuesday, July 18, 2017

अटल मंथन
उज्जैन में इतिहास रचा,वर्मा जी का काम जंचा !
( अभिनंदन समारोह का,आँखों देखा हाल ! )
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हृदय से सब बोले,दिल के द्वार खोले
ऐसा लगा हमको,मानो आए भोले !
सर्वधर्म समभाव मय,अनूठा मिलन देखा
साम्प्रदायिक सौहार्द का,संगम यहां हुआ !
सामाजिक शोध संस्थान में,शोध किया गया
मनोहारी सिंह को,राजा बना दिया !
प्रशासनिक अधिकारी सब,आप जैसे हों तो
वह दिन दूर नहीं,जब रामराज्य देखो !
पुनश्च ,
पुष्पमालाओं का,पहाड़ दिखा हमें आज
आपकी उपलब्धियों पर,शहर को है नाज !
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डॉ श्याम अटल  

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