Monday, July 24, 2017

अटल मंथन
प्रकृति का कहर,युद्ध से बदतर
मानव को आयेगी,क्या कभी समझ ?
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कहीं भी रहिये,आप सुरक्षित नहीं
बाढ़ में बहने लगी,बहुमूल्य जिंदगी !
देश जलप्रलय की,समस्या से जूझ रहा
सेना की मदद से,राहत कार्य चल रहा !
ऐसे में चीन को,युद्ध की सूझी
मानवता की पहेली,उसने न बूझी !
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डॉ श्याम अटल 

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