अटल मंथन
दिल्ली में बैठकर,देश को जानना कठिन
टूटने लगे हैं,जनता के दिल !
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जीना दूभर किया,आम जनता का
धन है खाते में,पर उपलब्ध कहां ?
लेन-देन हेतु,कैश नहीं है पास
और कहीं से मिलने की,छूट चुकी है आस !
धन तो ले लेती,पर देती नहीं है बैंक
एक ही जवाब है,पास नहीं है कैश !
धन की किल्लत से,जनता परेशान
खेतिहर किसान,सबसे ज्यादा निराश !
बीज न बोयेंगे,तो कैसे उगेगा अनाज ?
महंगाई के साथ,भूखमरी का त्रास ?
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डॉ श्याम अटल
दिल्ली में बैठकर,देश को जानना कठिन
टूटने लगे हैं,जनता के दिल !
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जीना दूभर किया,आम जनता का
धन है खाते में,पर उपलब्ध कहां ?
लेन-देन हेतु,कैश नहीं है पास
और कहीं से मिलने की,छूट चुकी है आस !
धन तो ले लेती,पर देती नहीं है बैंक
एक ही जवाब है,पास नहीं है कैश !
धन की किल्लत से,जनता परेशान
खेतिहर किसान,सबसे ज्यादा निराश !
बीज न बोयेंगे,तो कैसे उगेगा अनाज ?
महंगाई के साथ,भूखमरी का त्रास ?
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डॉ श्याम अटल
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