Wednesday, November 16, 2016

अटल मंथन
राहतें कईं मिली,पर कम पड़ गईं
जिंदगी कतार में ही,गुजर रही अभी !
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लम्बी-लम्बी लाईनें खत्म होंगी,नहीं लगता है
आवश्यकता से बेहद कम,काउंटरों की संख्या है !
काम धंधा छोड़कर,एक ही काम करने को बचा
नोट जमा करने-बदलाने,जन बल बैंक की ओर चला !
भला होगा देश का इससे,ऐसा जरूर लगता है
फिर भी वक्त बताएगा,अभी तो कष्ट दिखता है !
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डॉ श्याम अटल

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