अटल मंथन
चोर को कहे चोरी कर,साहूकार को कहे जागता रह
चुनाव के दिनों में यू पी,चल पड़ा इस राह पर !
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कोई आग लगा रहा,और कोई बुझा रहा
इन दोनों के बीच में,वोटर पिसा जा रहा !
नेताओं में फूट पड़े,या संतों में डाली जाए
मीडिया के जरिये आंच,आमजन तक आए !
बनती बात बिगड़ जाती,जब खबरें जगजाहिर हों
पारदर्शिता के इस युग में,झेलना पड़े यह दोष तो !
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डॉ श्याम अटल
चोर को कहे चोरी कर,साहूकार को कहे जागता रह
चुनाव के दिनों में यू पी,चल पड़ा इस राह पर !
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कोई आग लगा रहा,और कोई बुझा रहा
इन दोनों के बीच में,वोटर पिसा जा रहा !
नेताओं में फूट पड़े,या संतों में डाली जाए
मीडिया के जरिये आंच,आमजन तक आए !
बनती बात बिगड़ जाती,जब खबरें जगजाहिर हों
पारदर्शिता के इस युग में,झेलना पड़े यह दोष तो !
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डॉ श्याम अटल
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