अटल मंथन
जिसे जो भाषा समझ में आए,उसी में समझाएं
आतंकियों को जहां भी मिले ,तत्काल निपटाएं !
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बंदूकों के साये में होगी,अमरनाथ यात्रा
दुश्मनों की दुश्मनी का,सिर पर साया !
महाभारत-महादुनिया,चलती रहेगी
आतंकी घटनाएं,यूँ ही घटती रहेंगी !
प्रेम से रूपांतरण का,प्रयास किया जाए
जिन्हें समझ न आए,उन्हें भून दिया जाए !
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डॉ श्याम अटल
जिसे जो भाषा समझ में आए,उसी में समझाएं
आतंकियों को जहां भी मिले ,तत्काल निपटाएं !
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बंदूकों के साये में होगी,अमरनाथ यात्रा
दुश्मनों की दुश्मनी का,सिर पर साया !
महाभारत-महादुनिया,चलती रहेगी
आतंकी घटनाएं,यूँ ही घटती रहेंगी !
प्रेम से रूपांतरण का,प्रयास किया जाए
जिन्हें समझ न आए,उन्हें भून दिया जाए !
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डॉ श्याम अटल