Saturday, June 23, 2018

अटल मंथन
तेज रफ्तार जिंदगी को,सदा के लिये ब्रेक
सावधान न रहे तो,दुर्घटनाएं देख !
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दुर्घटनाएं आम हो गईं,रोज का काम हो गई
जिंदगी वीरान हो रही,गम भरी शाम हो रही !
समय बचाने की दौड़ में,काल पकड़ लेता है
बहुमूल्य जिंदगानी,प्राणघाती बना देता है !
अनगिनत सड़क दुर्घटनाएं,रोज देखते पढ़ते हैं
सबक न लिया तो,मुसीबत में पड़ेंगे !
पुनश्च -
जान हथेली पर रखकर,वाहन न चलाना
ईश्वर नहीं सुनने वाले,कोई भी बहाना !
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डॉ श्याम अटल 

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