अटल मंथन
मन के हारे हार,मन के जीते जीत
दिल दिमाग में समझ ले,बात ये मेरे मीत !
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मन शरीर को रुग्ण करे,तो शरीर समाप्त हो जाय
अच्छा भला स्वस्थ आदमी,आत्मघात पर आये !
भय्यू जी का महाप्रयाण,चर्चा का विषय बना
समझ में आया जगत में,कोई न किसी का सगा !
गृहकलह-राजनीतिक दबाव,सब मिलकर देते ताव
बदले में दे जाता है,भुक्तभोगी एक गहरा घाव !
समय किसी को नहीं बख्शता,कर्मफल देने को उत्सुक
राजनीतिक अथवा आध्यात्मिक,चाहे बड़ी हो शख्सियत !
विनाशकाले विपरीत बुद्धि,होकर रहता है
संबंधित परिवार विछोह का,दर्द सहता है !
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डॉ श्याम अटल
मन के हारे हार,मन के जीते जीत
दिल दिमाग में समझ ले,बात ये मेरे मीत !
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मन शरीर को रुग्ण करे,तो शरीर समाप्त हो जाय
अच्छा भला स्वस्थ आदमी,आत्मघात पर आये !
भय्यू जी का महाप्रयाण,चर्चा का विषय बना
समझ में आया जगत में,कोई न किसी का सगा !
गृहकलह-राजनीतिक दबाव,सब मिलकर देते ताव
बदले में दे जाता है,भुक्तभोगी एक गहरा घाव !
समय किसी को नहीं बख्शता,कर्मफल देने को उत्सुक
राजनीतिक अथवा आध्यात्मिक,चाहे बड़ी हो शख्सियत !
विनाशकाले विपरीत बुद्धि,होकर रहता है
संबंधित परिवार विछोह का,दर्द सहता है !
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डॉ श्याम अटल
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