Wednesday, June 27, 2018

अटल मंथन
हाँ जी या ना जी ?
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एक दूसरे के जानी दुश्मन,बनकर होती राजनीति
एक की होती सदगति,दूसरे दल की दुर्गति !
ईश्वर से आराधना,नेताओं को दें सन्मति
आशा है मेरे मित्रों की,मिलेगी इसमें सम्मति !
सत्ता को लालायित दल,लगाते जान की बाजी
जनता उससे राजी जिसकी,मीडिया घुमा दे चाबी !
पुनश्च,
कान की कच्ची जनता,जो कहो वह मान ले
बशर्ते पार्टी मीडिया द्वारा,प्रचार-प्रसार ठान ले !
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डॉ श्याम अटल 

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