Thursday, June 14, 2018

अटल मंथन
केंद्र-राज्य की लड़ाई,सीमा रेखा के पार
बीजेपी और आपका,धरना बना हथियार !
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विविध-विविध हड़तालें,और राजनीतिक धरना
जो भी आपको करना है,सोच समझकर करना !
राजनीति गांधीगिरी से,अछूती न रही
दिल्लीवासियों की दिनचर्या,संकट में पड़ी !
राजधानी के ये हाल,तो शेष का क्या होगा ?
जिनके हाथ में सत्ता,उनका ये कैसा रोना ?
जिन्हें काम करना चाहिये,फरमा रहे आराम
ऐसे कैसे हो सकेगा,हिंदुस्तान का विकास ?
प्रदूषण से जूझ रही,दिल्ली पर आंधी आई
युद्ध स्तर पर जिन्हें चेतना,वे धरने पर भाई !
केंद्र राज्य के झगड़े में,कोई चैन से बैठे ना
अड़ंगे इतने लगाओ,भूल जाये सुख सत्ता का !
जिससे सुख की आकांक्षा,वह सरकार स्वयं दुखी
बड़ी मछली छोटी के पीछे,हाथ धोकर पड़ी ?
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डॉ श्याम अटल  

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