Wednesday, May 9, 2018

अटल मंथन
भूकंप मनुज का,अभिमान तोड़ देता है
आंधी-तूफान भी,जानलेवा हुआ करता है !
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प्रकृति कहर ढाती है,इंसान को अकल नहीं आती है
चाहे आये आंधी-तूफान,उसको अपने पर ही गुमान !
मनुष्य की शक्ति,दो जगह विभक्त हो जाती है
विपदाओं से निपटने में,और आपस में लड़ने में !
यदि विध्वंस छोड़ दे,निर्माण पर ध्यान दे
तो जीते जी स्वर्ग,और मरने पर निर्वाण है !
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डॉ श्याम अटल 

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