Thursday, February 9, 2017

अटल मंथन
कईं दिनों तक लगता,चलेगा झगड़ा
नोटबंदी करके,भ्रष्टाचार जो पकड़ा !
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मुहर कहो या रेनकोट,बात एक ही है
यहां कुछ भी सम्भव है,ये भारत देश है !
पी एम की मनमोहक बातें,विपक्ष को न सुहाई
विरोधी स्वर गूंजे सदन में,संसद न चल पाई !
शब्दों की जादूगरी,राजनीति में रोज की बात
दे जातीं मजबूत दिलों,को भी ये बड़ा आघात !
माफी मांगेंगे मोदी,असम्भव सा लगता है
भले ही उनका ये जुमला,विपक्ष को न जंचता है !
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डॉ श्याम अटल

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