अटल मंथन
बैंकों से भरोसा,उठने लगा है
जनता से भाग्य,रुठने लगा है !
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घोटालेबाज घोटाला करके,घूम रहे हैं
और जांच दल उन्हें,सर्वत्र ढूंढ रहे हैं !
आज नहीं तो कल,उम्मीद है पकड़े जायेंगे
पर क्या अधिकारी उन्हें,भारत ला पायेंगे ?
सजा कभी वे पाएंगे,इसमें तो संदेह है
कैसे धन लौटायेंगे,जब मिल-बांटकर खायेंगे ?
पर्दा उठना मुश्किल है,कईं चेहरे नकाब में
आँख मूंदकर रखिये वरना,मिल जायेंगे खाक में !
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डॉ श्याम अटल
बैंकों से भरोसा,उठने लगा है
जनता से भाग्य,रुठने लगा है !
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घोटालेबाज घोटाला करके,घूम रहे हैं
और जांच दल उन्हें,सर्वत्र ढूंढ रहे हैं !
आज नहीं तो कल,उम्मीद है पकड़े जायेंगे
पर क्या अधिकारी उन्हें,भारत ला पायेंगे ?
सजा कभी वे पाएंगे,इसमें तो संदेह है
कैसे धन लौटायेंगे,जब मिल-बांटकर खायेंगे ?
पर्दा उठना मुश्किल है,कईं चेहरे नकाब में
आँख मूंदकर रखिये वरना,मिल जायेंगे खाक में !
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डॉ श्याम अटल
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