Monday, February 19, 2018

अटल मंथन
बड़े नकारते हैं,धन डकारते हैं
इन दिनों सरकारी,रेडार पर हैं !
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नित नए प्रकरण,प्रकाश में आ रहे
कर्ज भरा जीवन,अंधकारमय है !
नोटबंदी के दूरगामी,असर दिखने लगे
जमा कराते नोट,पर वे तो छिन गए ! 
रातोंरात वाहवाही,तबाही में बदली
मिलना है मुश्किल,बचने की कोई गली !
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डॉ श्याम अटल 

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