अटल मंथन
कोई कहे अच्छा बजट,कोई कहे बुरा
क्या चुनाव जीतने का,लक्ष्य होगा पूरा ?
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एक हाथ दिया,दूसरे हाथ वापस लिया
लेन-देन का व्यवहार,तुरंत पूरा किया !
आशाएं जनता की,कभी पूरी नहीं होतीं
आश्वासन देने में कभी,कसर नहीं रहती !
सरकारी तनख्वाह बढ़ी,प्रायवेट में चिंता दिखी
सरकार को देने के बाद,हैसियत ही न बची !
झुनझुने कईं दिये,वोट बैंक के लिए
दो पाटन के बीच में,मध्यमवर्गीय पिसे !
जो जिस क्लास में हैं,वहीं बने रहेंगे
विकास की कोशिशें,अवश्य जारी रखेंगे !
बी जे पी शासित प्रधान,प्रशस्ति गाते दिखे
विपक्षी दल शिकायती,बैंड बजाते रहे !
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डॉ श्याम अटल
कोई कहे अच्छा बजट,कोई कहे बुरा
क्या चुनाव जीतने का,लक्ष्य होगा पूरा ?
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एक हाथ दिया,दूसरे हाथ वापस लिया
लेन-देन का व्यवहार,तुरंत पूरा किया !
आशाएं जनता की,कभी पूरी नहीं होतीं
आश्वासन देने में कभी,कसर नहीं रहती !
सरकारी तनख्वाह बढ़ी,प्रायवेट में चिंता दिखी
सरकार को देने के बाद,हैसियत ही न बची !
झुनझुने कईं दिये,वोट बैंक के लिए
दो पाटन के बीच में,मध्यमवर्गीय पिसे !
जो जिस क्लास में हैं,वहीं बने रहेंगे
विकास की कोशिशें,अवश्य जारी रखेंगे !
बी जे पी शासित प्रधान,प्रशस्ति गाते दिखे
विपक्षी दल शिकायती,बैंड बजाते रहे !
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डॉ श्याम अटल
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