अटल मंथन
दूध का धुला कोई नहीं
भ्रष्टाचार है हर कहीं !
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भ्रष्टाचारी रोजाना,पकड़े जाते हैं
राजनीतिक विद्वेष का,आरोप मड़ाते हैं ?
अपनों को छोड़ा जाता,पराये रोज धराते हैं
सत्ताधीश अघोषित,अधिकार जताते हैं ?
जनता जानने लगी,परिणाम भी दिखने लगे
उलटफेर देखकर,हर कोई अचम्भित है !
एन डी ए से मोहभंग,की शुरुआत हुई
चंद्रा बाबू ने भी,अपनी सोच बदली ?
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डॉ श्याम अटल