Tuesday, January 16, 2018

अटल मंथन
आवाज उठाना गुनाह है
उठायें तो कौन पनाह दे ?
     ( चिंतनीय ! )
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राजनीति से कोई,संस्था अछूती नहीं
जगजाहिर न होने से,अनुभूति नहीं !
परदे के पीछे क्या होता,दिखता नहीं
दिखने भी लगे तो,व्यक्ति सीखता नहीं !
मन में बात छिपाकर,रखना मुश्किल हो चला
पेट में बात पचा न सके,तो जग का हुआ भला ?
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डॉ श्याम अटल 

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