Sunday, August 6, 2017

अटल मंथन
अमन-चैन के हम प्रहरी,आत्मघात का वह हिमायती
भारत विकास चाहता है,चीन विनाश ला रहा है !
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भारत शान्ति चाहता है,चीन जबकि युद्ध
सारा संसार है,इस दुष्ट से क्रुद्ध !
चीन का मुखौटा,उतर गया है
कुरूप रूप सामने,आ रहा है !
दुनिया को ड्रेगन,खा रहा है
भारत भूटान को,बचा रहा है !
भारत संसार को,स्वर्ग बना रहा
चीन नर्क का,जनक कहला रहा !
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डॉ श्याम अटल

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