अटल मंथन
अब पाक साफ,बातें हों
और सुकून भरी,रातें हों !
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रोज का सिरदर्द,अब मिटा दो
दुश्मन पाक से,तुरंत बदला लो !
कायराना हरकतें,वह न छोड़ेगा
मार खायेगा,तब हाथ जोड़ेगा !
साजिश के पत्थर,अब न चलेंगे
देशद्रोहियों को,गोली मार दें !
कुपवाड़ा की कुटिल चाल,जैसे कुचली है
जांबाजी से अबकि,नापाक हस्ती मिटनी है !
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डॉ श्याम अटल
अब पाक साफ,बातें हों
और सुकून भरी,रातें हों !
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रोज का सिरदर्द,अब मिटा दो
दुश्मन पाक से,तुरंत बदला लो !
कायराना हरकतें,वह न छोड़ेगा
मार खायेगा,तब हाथ जोड़ेगा !
साजिश के पत्थर,अब न चलेंगे
देशद्रोहियों को,गोली मार दें !
कुपवाड़ा की कुटिल चाल,जैसे कुचली है
जांबाजी से अबकि,नापाक हस्ती मिटनी है !
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डॉ श्याम अटल
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