अटल मंथन
चिंतनीय
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खाते यहां की,बजाते वहां की
दिखते हुए भी,दिखता ना जी !
सब जगह,देखी है झांकी
पर कश्मीर में,अभी है बाकी !
जल्दी ही वह,दिन आयेगा
जब रहवासी,जाग जायेगा !
और स्वयं ही,सजा सुनायेगा
दुश्मनों को,मार गिरायेगा !
राष्ट्र भक्ति,जगाने की देर
मिटने लगेगा,वहां भी अंधेर !
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डॉ श्याम अटल
चिंतनीय
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खाते यहां की,बजाते वहां की
दिखते हुए भी,दिखता ना जी !
सब जगह,देखी है झांकी
पर कश्मीर में,अभी है बाकी !
जल्दी ही वह,दिन आयेगा
जब रहवासी,जाग जायेगा !
और स्वयं ही,सजा सुनायेगा
दुश्मनों को,मार गिरायेगा !
राष्ट्र भक्ति,जगाने की देर
मिटने लगेगा,वहां भी अंधेर !
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डॉ श्याम अटल
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