अटल मंथन
मांगकर-छीनकर,यहां लेने का रिवाज है
भारत में स्वतंत्रता,कुछ ज्यादा ही आज है !
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अकल बड़ी या भैंस में,भैंस बड़ी इस देश में
और सीधी न समझना,हर घड़ी तैश में !
मुफ्त का माल किसे न भाए,क्यूं मेहनत कर नंबर लाएं ?
सरकार जब मेहरबान,तो पूरे क्यूं न हों अरमान ?
आंदोलन की आड़ में अफ़सोस,लूटे गए लोग
हरयाणा में अभी भी पसरा,मातम गहरा शोक !
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डॉ श्याम अटल

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