Sunday, February 14, 2016

अटल मंथन
राजनीतिक मजबूरियां,बढ़ा रही हैं दूरियां
अनचाहे अनजाने ही,चलती शब्दों की छुरियाँ !
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वैलेंटाइन डे पर,राजनीति से प्रेम है गायब
सत्ता की चाहत में भूले,राजनीतिक दल शायद !
काला दिवस-छलावा दिवस,लेकर सामने आए
विदेशियों के प्रेम के सम्मुख,देसी प्रेम जताए !
सही-गलत का आकलन,करने की जरूरत नहीं
विपक्षी दल विरोध जताए,उनका काम यही !
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डॉ श्याम अटल 

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