Thursday, May 21, 2015

अटल मंथन
बात जान लें,खरी-खरी
स्वार्थ है,सर्वोपरि !
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राजनीतिक रागद्वेष,सुखपूर्वक न जीने दे
समस्त ऊर्जा शक्ति,लड़ने-भिड़ने में लगे !
राजनीतिज्ञों की बनिस्बत,आम आदमी सुखी है
बहुमत के बाद भी,केंद्र और राज्य दुखी हैं !
एक दूसरे की टांग खींचने,में माहिर हैं नेता
समन्वय की बात,कोई भी दल नहीं कहता !
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डॉ श्याम अटल

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