अटल मंथन
दिन पलटते लगे न देर - लो होने लगी अंधेर !
( संदर्भ - एल्फिंस्टन रेल्वे ब्रिज हादसा )
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रेल्वे पर फिर विपदा,हो गया एक और हादसा
अनचाहे दुर्घटना घट गई,अनमोल जानें सस्ते में गईं !
हादसे पर हादसे,लोकप्रियता घटाते हैं
दुर्भाग्यवश सरकार को,दोषी ठहराते हैं !
विपक्ष को विरोध का,मौक़ा स्वतः मिल जाता है
जनमानस भी जनहानि,देखकर हिल जाता है !
दिन रात की तरह,अच्छे बुरे दिन आते हैं
कभी इन्हें हंसाते हैं,कभी उन्हें रुलाते हैं !
अस्तु,
मृतकों को श्रद्धांजलि,घायल जल्दी निरोगी हों
ठोस कदम उठाइये,दुर्घटनाएं पुनः न हों !
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डॉ श्याम अटल
दिन पलटते लगे न देर - लो होने लगी अंधेर !
( संदर्भ - एल्फिंस्टन रेल्वे ब्रिज हादसा )
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रेल्वे पर फिर विपदा,हो गया एक और हादसा
अनचाहे दुर्घटना घट गई,अनमोल जानें सस्ते में गईं !
हादसे पर हादसे,लोकप्रियता घटाते हैं
दुर्भाग्यवश सरकार को,दोषी ठहराते हैं !
विपक्ष को विरोध का,मौक़ा स्वतः मिल जाता है
जनमानस भी जनहानि,देखकर हिल जाता है !
दिन रात की तरह,अच्छे बुरे दिन आते हैं
कभी इन्हें हंसाते हैं,कभी उन्हें रुलाते हैं !
अस्तु,
मृतकों को श्रद्धांजलि,घायल जल्दी निरोगी हों
ठोस कदम उठाइये,दुर्घटनाएं पुनः न हों !
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डॉ श्याम अटल