Sunday, September 4, 2016

अटल मंथन
धन यहां कबाड़ा,और वहां पर गाड़ा
पीछे पड़ो कितना भी,अभी तो पछाड़ा !
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देश की बैंकों से धन लिया,विदेश में निवेश किया
जब पर्याप्त कमा लिया,देश सहर्ष छोड़ दिया !
माल्या अब इंग्लैण्ड की,शोभा बढ़ा रहे हैं
पूर्व प्रेषित पैसों से,मौज उड़ा रहे हैं !
विजय गाथाएं ऐसी,अनेक सुनाई जा रहीं
विजय पताकाएं परदेस में,खूब फहराई जा रहीं !
सब कुछ जप्त हो जाए,तो भी लाभ का सौदा है
पूंजीपतियों के प्रभाववश,जिम्मेवार यहां सोता है !
नई कहावत -
अब पछतायत होत क्या,जब चिड़िया चुग गई खेत
सावधान ! आगे न खेले,बहुरूपिया यह खेल !
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डॉ श्याम अटल

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