Friday, September 13, 2019

अटल वाणी - 566
*अंशावतार*
*******************
वही जन्मता
वही है मरता
तू खेले-देखे
साँसें भरता !
काहे भईया
आहें भरता
और बेवजह
डरा करता !
*******************
डॉ श्याम अटल

No comments:

Post a Comment