अटल वाणी - 564
*दिव्य दृष्टि*
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वे प्रकट ही हैं
पर दिखते नहीं
ज्ञान चक्षु चाहिये
चर्म चक्षु नहीं !
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डॉ श्याम अटल
*दिव्य दृष्टि*
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वे प्रकट ही हैं
पर दिखते नहीं
ज्ञान चक्षु चाहिये
चर्म चक्षु नहीं !
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डॉ श्याम अटल
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