Sunday, August 19, 2018

अटल मंथन
यहां-वहां गले लगाना,खतरे से खाली नहीं
उम्मीद तो थी बहुत,,पर बजती ताली नहीं !
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क्रिकेटर नेता बन जाए तो,शिखर पर भी पहुंच सकते
इमरान ने साबित किया,वे पाक पीएम बन गए !
समारोह में अनेकों जाने थे,जा पाया बंदा बस एक
पर मुसीबत में पड़ा,इरादे जबकि थे उसके नेक !
गले लगाना गलत तो न था,गले की हड्डी बन गया
जनरल से दोस्ती का हाथ,दुश्मनी बढ़ा गया ?
राजनीति के आंगन में,व्यक्ति नहीं पार्टी है मुख्य
सिध्धू सिद्ध करने में जुटे,फिर भी खतम न उनके दुःख !
मणिशंकर की कांग्रेस वापसी,मुद्दा और उछाल गई
बीजेपी ने मौका देखकर,इसलिये डबल खिंचाई की ?
पुनश्च -
मारने के साथ पुचकारना भी,चलते रहना चाहिये
जब जो दाव उचित लगे,शॉट लगाते जाईये !
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डॉ श्याम अटल 

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