Sunday, August 12, 2018

अटल मंथन
जल तो चाहिये,पर तबाही साथ न लाए
बारिश में बेघर होकर,लोग कहाँ जाएं ?
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उत्तर से दक्षिण तक देश,बाढ़ की चपेट में
रुह काँप जाती है,तबाही के दृश्य देख के !
इंद्र देव के कोप का,तोड़ नहीं दिखा
जो जहां था वहीं,राह अवरुद्ध होने से रुका !
धन,बल और समय देकर,जो सड़कें बनाई गयीं
अतिवृष्टि के चलते टूटकर,बाढ़ में बहीं !
आर्थिक उत्थान देश का,हो नहीं पाता है
दो कदम चलकर विकास,फिर थम सा जाता है !
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डॉ श्याम अटल 

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