अटल मंथन
घर का भेदी,लंका ढहाए
राजनीति में,पद जब जाए !
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चोर-चोर मौसेरे,भाई न बन सके
समय देखकर सरकारी,गवाह वे बने !
राजनीतिक दुष्कृत्यों की,दास्तां सुनो
भ्रष्टाचार की कहानियां,मन ही मन गुनो !
दिल दुखे तो दुखने दो,घुटने मत टेको
स्वच्छता की झाड़ू से,कचरा बुहार दो !
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डॉ श्याम अटल
घर का भेदी,लंका ढहाए
राजनीति में,पद जब जाए !
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चोर-चोर मौसेरे,भाई न बन सके
समय देखकर सरकारी,गवाह वे बने !
राजनीतिक दुष्कृत्यों की,दास्तां सुनो
भ्रष्टाचार की कहानियां,मन ही मन गुनो !
दिल दुखे तो दुखने दो,घुटने मत टेको
स्वच्छता की झाड़ू से,कचरा बुहार दो !
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डॉ श्याम अटल
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