अटल मंथन
दो धारी तलवार चलाना,सब न जानते
राजकाज निपटाना,सबसे मुश्किल मानते !
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आरोप-प्रत्यारोप,चलते रहेंगे
राजनीति में रोज,नई कथा कहेंगे !
सफाई अभियान,जारी रखा जायेगा
नित नए प्रकरण,सामने लायेगा !
सेवा संग मेवा,खटाई में पड़ा
मुंह का जायका,बिगड़ने लगा !
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डॉ श्याम अटल
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