Monday, May 23, 2016

अटल मंथन
प्रशस्ति गान - सिंहस्थ सम्मान !
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कुम्भ मेला निर्विघ्न,सम्पन्न हुआ
हर्षित हैं नगरवासी,प्रभु ने सुनी दुआ !
प्राकृतिक विपदाएं,नगण्य सी रहीं
भक्त और संतों पर,कृपा अपार की !
आतंकवादियों से भी,खतरा कम न था
महाकाल से संरक्षण,किन्तु पूरा मिला !
क्षिप्रा स्नान की,भक्तों में होड़ थी
घाट पर पहुंचने की,चहुं ओर दौड़ थी !
क्षिप्रा जल शुद्धि ने,मन सभी का मोहा
अमृत लाभ लेकर,रचा गया है दोहा !
प्रवचन-भजन-सत्संग,और नित्य संत दर्शन
अमिट छाप लेकर,मुदित है मन का दर्पण !
पुलिस और प्रशासन,चले थे 'अग्निपथ' पर
प्रशस्ति और बधाई,विदाई विजय रथ पर !
'महा नगर' बना दिया,उज्जैन को 'शिव राज' ने
शहरवासियों की सुध,लेते रहें आगे भी 'वे' !
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डॉ श्याम अटल

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