अटल मंथन
भारत की पीड़ा,बस भारत ही जाने
कितने तरह के हैं,यहाँ रोज हंगामे !
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आबादी अत्यधिक,और पड़ौसी दुश्मन
एक नहीं दो - दो,सीमा पर मुश्किल !
जातिगत राजनीति से,आरक्षण को बल
विद्यार्थी जीवन से ही,नफरत प्रति पल !
अमीर-गरीब के बीच की खाई,पाटे नहीं पटती
भ्रष्टाचार पर नकैल,कभी नहीं कसती !
बिजली और पानी को,तरसती जनता
सड़कों पर जाम,रोज की घटना !
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डॉ श्याम अटल
भारत की पीड़ा,बस भारत ही जाने
कितने तरह के हैं,यहाँ रोज हंगामे !
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आबादी अत्यधिक,और पड़ौसी दुश्मन
एक नहीं दो - दो,सीमा पर मुश्किल !
जातिगत राजनीति से,आरक्षण को बल
विद्यार्थी जीवन से ही,नफरत प्रति पल !
अमीर-गरीब के बीच की खाई,पाटे नहीं पटती
भ्रष्टाचार पर नकैल,कभी नहीं कसती !
बिजली और पानी को,तरसती जनता
सड़कों पर जाम,रोज की घटना !
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डॉ श्याम अटल
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