Friday, April 8, 2016

अटल मंथन
दोस्त,दोस्त ना रहा
कलियुग की यही व्यथा !
( पनामा प्रहार ! )
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अमर बातें,सामने आ रहीं
मित्र को मुसीबत में,फंसा रही !
अमिताभ का काम,अजिताभ देखते थे
यह भी एक,बहुत बड़ा पेंच है !
सहारा देने का,समय ना रहा
और बेपनाह धन है तो,लगाएं कहां ?
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डॉ श्याम अटल 

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