Saturday, April 16, 2016

अटल मंथन
ख़ुशी अचानक गम में,बदल जाती है
दिल दहलाती दुर्घटनाएं,जब सामने आती हैं !
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सड़कें कितनी भी चौड़ी बनाएं,सकड़ी पड़ जाती हैं
आगे निकलने की होड़ में,दुर्घटना घट जाती है !
तेज गति ने कहर  बरपाया ,जीवन  अस्तव्यस्त बनाया
हमारे देश में हादसों ने,मानो नव कीर्तिमान रचाया !
आये दिन सड़कें रक्त रंजित,गाड़ियों में आग लगी हुई
ह्रदय विदारक हादसों ने,असमय कीमती जानें लीं !
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डॉ श्याम अटल

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