Tuesday, June 23, 2015

अटल मंथन
राजनीति में नये चेहरे,रातों रात नहीं मिलते
इसलिए दलबदलू दागी,प्रत्याशी चुनाव में चलते !
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बेनकाब हो जाते चेहरे,फिर भी रहते खिले खिले
राजनीति का गीत है ऐसा,हर हालत में जीत है !
नहले पर दहले कईं देखे,दिग्गज भी धराशयी हुए
पर फिर भी लड़ने हेतु,धनाभाव में कभी न रहे !
डूबते सूरज पर भी,दाव लगा दिया जाता है
हारते घोड़े पर भी,अच्छा भाव आता है !
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डॉ श्याम अटल

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