अटल मंथन
राजनीतिक रंजिशें कहीं,मुश्किल न बढ़ाए
सोच-सोचकर जनता का,दिल बड़ा घबराए !
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जो चाहे कर सकती है,बहुमत की सरकार
कब करेगी-कैसे करेगी,अभी है इंतजार !
केंद्र और दिल्ली में मिला,स्पष्ट जनादेश
पर विरोधी दल होने से,मन में है आवेश !
चलें तालमेल से दोनों,तो देश का है कल्याण
वरना 5 साल तक होगी,रोज ही घमासान !
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डॉ श्याम अटल
राजनीतिक रंजिशें कहीं,मुश्किल न बढ़ाए
सोच-सोचकर जनता का,दिल बड़ा घबराए !
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जो चाहे कर सकती है,बहुमत की सरकार
कब करेगी-कैसे करेगी,अभी है इंतजार !
केंद्र और दिल्ली में मिला,स्पष्ट जनादेश
पर विरोधी दल होने से,मन में है आवेश !
चलें तालमेल से दोनों,तो देश का है कल्याण
वरना 5 साल तक होगी,रोज ही घमासान !
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डॉ श्याम अटल
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