अटल वाणी - 447
क्या आप निराश हैं ?
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प्रशंसा करने में कंजूसी,आम बात है
पर मीनमेख ढूंढने में,सभी सरताज हैं !
बदल लें स्वभाव,यदि आज से
तो सुख-समृद्धि,सदैव पास है !
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डॉ श्याम अटल
क्या आप निराश हैं ?
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प्रशंसा करने में कंजूसी,आम बात है
पर मीनमेख ढूंढने में,सभी सरताज हैं !
बदल लें स्वभाव,यदि आज से
तो सुख-समृद्धि,सदैव पास है !
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डॉ श्याम अटल
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