Sunday, January 25, 2015

अटल वाणी - 442
गागर में सागर !
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क्षणिकाएँ क्षण क्षण में बनतीं,मानो वे हैं जीवन सार
ईश ज्ञान पाकर बंधु,मिलता है आनंद अपार !
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डॉ श्याम अटल

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